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भनुप्रतापपुर(CG.)। कॉलेज की भूमि पर लगातार हो रहा अतिक्रमण : रोकने में नाकाम हुआ स्थानीय प्रशासन :देखे प्राचार्य व कराठी सरपंच ने क्या कहा

अतिक्रमणकारी बेधड़क अपने कार्य को अंजाम देते हैं।

शासकीय महर्षि वाल्मीकि स्नातकोत्तर महाविद्यालय भानुप्रतापपुर की अधिकृत भूमि पर कई वर्षो से अतिक्रमण का खेल जारी है। प्रशासन द्वारा कई बार हटाने के बाद भी अतिक्रमणकारियों द्वारा पुनः कच्चा पक्का मकान बना कर कब्जा कर लिया जाता है और कॉलेज प्रबंधन मूक दर्शक बना रहता है। वर्तमान में कॉलेज भवन के ठीक सामने में अतिक्रमण कर मकान बनाया गया है। कॉलेज प्रशासन द्वारा केवल औपचारिकता निभाते हुए अतिक्रमण हटाने को लेकर एसडीएम व कलेक्टर को आवेदन दिया गया है। इसके पूर्व भी कई बार आवेदन दिया गया पर अतिक्रमणकारियों द्वारा रुक रुक कर कार्य जारी रखते हुए मकान को पूर्ण कर लिया गया।

ज्ञात हो कि विगत कुछ वर्षों में कॉलेज के पास रेल्वे लाईन के किनारे कई लोगों द्वारा अतिक्रमण किया गया है। प्रशासन द्वारा इन पर कार्यवाही भी की गई, लेकिन अतिक्रमणकारियों द्वारा रुक रुक कर कार्य करते हुए पुनः अतिक्रमण कर लिया गया है। इस मामले में कॉलेज प्रशासन पर भी उंगलिया उठ रही हैं, क्योंकि जब अतिक्रमण का खेल शुरु होता है तो कॉलेज प्रशासन सख्ती से कार्यवाही ना करते हुए केवल पत्राचार तक सीमित रह जाते है और मकान बनकर तैयार हो जाते है। कार्यवाही के अभाव व कॉलेज प्रबंधन की अपनी भूमि संरक्षण में रुचि न होने के चलते अतिक्रमणकारी बेधड़क अपने कार्य को अंजाम देते हैं।

भानुप्रतापपुर महाविद्यालय की प्रचार्य डॉ. रश्मि सिंह ने बताया कि ग्राम कराठी में खसरा नम्बर 227/1 रकबा 16.96 एकड़ व खसरा नम्बर 238/01 (क) रकबा 16.67 एकड़ एवं ग्राम कन्हारगांव में खसरा नम्बर 01 रकबा 05.12 एकड़ आबंटित है। उक्त भूमि पर पोस्ट मेट्रिक कन्या छात्रावास बनना प्रस्तावित है। किन्तु विगत कुछ दिनों से उक्त भूमि पर ईंट पत्थर से पक्का मकान का निर्माण कराया जा रहा है। हमारे द्वारा तहसीलदार, एसडीएम व कलेक्टर को पत्र लिख कर उक्त भूमि से अतिक्रमण हटवाने की मांग की गयी है।

इस मामले पर कराठी सरपंच चेतन मरकाम का कहना है कि ग्राम पंचायत कराठी द्वारा कॉलेज को 38 एकड़ जमीन दी गयी थी, लेकिन कॉलेज प्रशासन अपनी ही भूमि को सुरक्षित रखने में नाकाम साबित हो रही है। कॉलेज प्रशासन की निष्क्रियता के चलते शासकीय भूमि अतिक्रमण की भेंट चढ़ती जा रही है। इस पर कॉलेज प्रबंधन द्वारा कार्यवाही न करना उनकी संलिप्तता को भी दर्शाता है। प्रशासन द्वारा कई बार कॉलेज की भूमि का सीमांकन किया गया है, उसके बावजूद वे अपनी भूमि के संरक्षण में नाकाम हैं। कोई भी मकान रातों रात नहीं बनता, जब मकान का कार्य शुरू होता है उसी समय कॉलेज प्रबंधन को एक्शन लेना चाहिए।

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